Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 113, Verses 29–30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 113, verses 29–30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 113 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
वियोगिनामथान्येषां कान्ताविभवशालिनाम् ।
रात्रिर्वत्सरवद्दीर्घा भवेत्तस्याः प्रसादतः ॥ २९ ॥
सुखितस्याल्पतामेति दुःखितस्यैति दीर्घताम् ।
कालो यस्याः प्रसादेन विपर्यासैकशीलिनाम् ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
कान्तारूपी विभव से शोभित होने वाले विरही पुरुषों की एक रात इसी
के प्रभाव से एक वर्ष सी लम्बी हो जाती है