Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 113, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 113, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 113 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
ज्वालावच्छुद्धवर्णापि मषीमलिनकोटरा ।
वल्गत्यन्यप्रसादेन दीयते तदवेक्षणात् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
सत्त्वगुण से
अग्नि की ज्वाला के समान शुद्ध वर्णवाली होने पर भी वह तमोगुण से स्याही के समान
भीतर में कृष्णवर्णवाली हे । परमात्मा की सन्निधि से उसमें चलनक्रिया है और उन्हीं के
साक्षात्कार से उसका विनाश हो जाता है