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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 111, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 111, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 111 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

अरम्यं रम्यरूपेण भावयित्वा स्वसंविदा । मल्लेनेव शिशुश्चित्तमयत्नेनैव जीयते ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

अपनी वृद्धि से अरमणीय वस्तु की परम रमणीयब्रह्मरूप से भावना करके जैसे कोई बड़ा नामी पहलवान बच्चे को अनायास पछाड़ देता है, जीत लेता हे वैसे ही मन पर अनायास विजय प्राप्त ही जा सकती हे