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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 111, Verse 8

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 111, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 111 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

स्वायत्तमेकान्तहितं स्वेप्सितत्यागवेदनम् । यस्य दुष्करतां यातं धिक्तं पुरुषकीटकम् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

अविरक्त लोगों की निन्दा करते है। जिसको अपने अभीष्ट वस्तु के विषय में वेराग्यवृत्ति मुश्किल हो गई हो, जो अपने आधीन ओर परम हितकर है, उस पुरुष रूपी कीड़े को धिक्कार है