Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 111, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 111, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 111 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
पौरुषेण प्रयत्नेन चित्तमाश्वेव जीयते ।
अचित्तेनाप्रयत्नेन पदं ब्रह्मणि दीयते ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
अपने पौरुष प्रयत्न से शीघ्र ही मन पर विजय प्राप्त की जा सकती है, चित्तरहित
पुरुष (जिसका चित्त स्वतन्त्र नहीं है, वह पुरुष) प्रयास के बिना शीघ्र ही ब्रह्म में पैर रखता है
यानी ब्रह्म को प्राप्त करता हे