Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 111, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 111, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 111 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
परं पौरुषमाश्रित्य नीत्वा चित्तमचित्तताम् ।
तां महापदवीमेहि यत्र नाशो न विद्यते ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
परम पौरुष का अवलम्बन करके चित्त को अचित्त बनाकर उस
महापदवी को (परब्रह्मरूपता को) प्राप्त होइए, जहाँ पर नाश नहीं होता है