Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 110, Verse 61
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 110, verse 61 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 110 · श्लोक 61
संस्कृत श्लोक
नानास्फारसमुल्लासैः स्वसंकल्पोपकल्पितैः ।
मनो वल्गति देहेऽस्मिन्साध्वीवान्तःपुराजिरे ॥ ६१ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे पतिव्रता नारी अपने संकल्प से उदित विविध विस्तृत
उमंगों से अन्तःपुरके आँगन में विलास करती है वैसे ही मन इस देह में अपने संकल्प से
कल्पित विविध विस्तृत उमंगों से विलास करता है