Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 110, Verse 60
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 110, verse 60 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 110 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
प्रशाम्यत्युल्लसत्येति याति नन्दति वल्गति ।
मनःशरीरसंकल्पे फलिते न शरीरकम् ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
इसी प्रकार शरीर भी मन के संकल्प के अधीन ही है, ऐसा कहते हैं।
मनः शरीर के संकल्प के सफल होने पर ही स्थूल शरीर शान्ति को प्राप्त होता है,
उल्लसित होता है, आता है, जाता है, प्रसन्न होता है, शब्द करता है, स्वयं स्वन्त्ररूप से
कुछ नहीं करता है