Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 110, Verse 46
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 110, verse 46 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 110 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
अङ्कुरस्य यथा पत्रलतापुष्पफलश्रियः ।
मनसोऽस्य तथा जाग्रत्स्वप्नविभ्रमभूमयः ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे पत्र, लता, पुष्प, फलों की शोभा
अंकुर से अतिरिक्त नहीं हे यानी अंकुर से ही उत्पन्न है वैसे ही जाग्रत्, स्वप्न आदि विभ्रम
मनसे अतिरिक्त नहीं हैं यानी मन के ही कार्य हे