Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 107, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 107, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 107 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
चर्विताः खर्वितोष्ठेन द्वीपीपिशितपेशयः ।
नारकाहृतविक्रीता नारक्यो रशना इव ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
नारकी पुरुषों से लाई गई और नारकी पुरूषों
के हाथ भेजी गई नरक की अँतड़ियों की नाईं बाघ की मांसपेशियाँ, छोटे किये हुए ओठ से,
मैंने चबाई