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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 106, Verse 6

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 106, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 106 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

ततोऽद्रिं प्रलयक्षुब्धं पुष्करावर्तको यथा । तथा चलन्तं चलितः स्वश्वमारूढवानहम् ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर जैसे प्रलयकाल में उत्पातवश हिल रहे पर्वत पर सवार होकर पुष्करावर्तनामक मेघराज चलता है वैसे ही चल रहे उस सुन्दर घोड़े पर सवार हुआ मैं चला