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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 106, Verse 3

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 106, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 106 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

यावदभ्यागतो दूरात्कश्चिच्छाम्बरिकस्त्वयम् । रसातलादभ्युदितो मायी मय इव स्वयम् ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे पाताल से मायावी मय दानव अपने-आप निकल आवे वैसे ही यह कोई ऐन्द्रजालिक दूर से आ पहुँचा, यह भी सबको विदित है