Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 104, Verse 49
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 104, verse 49 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 104 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
विततविस्मितजिह्नितया तया जनतया भयमोहविषण्णया ।
स्तिमितचक्षुषि भूमिपतौ स्थिते मुकुलिताज्जवनस्य धृता द्युतिः ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
राजा के आँख बन्द करके बैठने पर
अति आश्चर्य से निरुत्साह हुई भय और मोह से दुःखी सभामण्डप की जनता ने जिसमें कमल
मुकुलित हैँ एसे कमल वन की शोभाधारण की