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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 100, Verse 13

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 100, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 100 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

नानातरुलतागुल्मजालपल्लवशालयः । निर्विकल्पकचिन्मात्रं नानाऽनिर्ज्ञातकल्पना ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

चूँकि वृक्ष, आडी आदि दृश्य प्रपंच अज्ञातचिद्विवर्त है, अतः एकमात्र चित्‌ ही तत्त्व है, ऐसा कहते हैं। विविध वृक्ष, लता, झाड़ियाँ, पललव और पेड़, पौधे आदि अज्ञात तत्त्वमें यह नाना कल्पना है, अतः निर्विकल्प चिन्मात्र ही है