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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 100, Verse 14

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 100, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 100 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

ब्रह्मैवेदमहंतत्त्वं जगत्पश्याद्य राघव । स आत्मा सर्वगो नाम नित्योदितमहावपुः ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, अब इस जगत्‌ को ओर “अहम्‌” रूप से भासित हो रहे जीवतत्त्व को आप ब्रह्मरूप ही देखिये, वह ब्रह्म से अतिरिक्त नहीं हे । वह आत्मा सर्वव्यापक है ओर उसका अनन्तस्वरूप नित्य प्रकाशमान है