Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 9, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 9, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
अन्यस्त्वां चेतयति चेत्तं चेतयति कोऽपरः ।
क इमं चेतयेत्तस्मादनवस्था न वास्तवी ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
चेतनरूप आपको कोड दूसरा चेतन प्रकाशित करता है, ऐसा यदि मानो, तो उसको भी
दूसरा चेतन प्रकाशित करेगा, यों अनवस्था भी होगी, ऐसा कहते हैं ।
यदि आपको अन्य कोई प्रकाशित करता है, तो उस प्रकाशित करनेवाले को कौन प्रकाशित
करेगा और उस दूसरे प्रकाशित करनेवाले को कौन प्रकाशित करेगा ? उसको भी अन्य करेगा
और उसको भी अन्य प्रकाशित करेगा, ऐसा माना जय, तो अनवस्था होगी । अनवस्था किसी
भी वस्तु को सिद्ध नहीं कर सकती । यों सद्वासनाओं का उद्बोध करने में आपकी स्वतन्त्रता
अक्षुण्ण है