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Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 9, Verses 30–31

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 9, verses 30–31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 30,31

संस्कृत श्लोक

शुभाशुभाभ्यां मार्गाभ्यां वहन्ती वासनासरित् । पौरुषेण प्रयत्नेन योजनीया शुभे पथि ॥ ३० ॥ अशुभेषु समाविष्टं शुभेष्वेवावतारय । स्वं मनः पुरुषार्थेन बलेन बलिनां वर ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

पुरुष की स्वतन्त्रता के साधन का फल कहते हैं। सन्मार्ग ओर असन्मार्ग से बह रही वासनारूपी नदी को अपने पुरुषप्रयत्न से अशुभ मार्ग से हटाकर शुभ मार्ग में लगाना चाहिए । हे बलवान में श्रेष्ठ श्रीरामचन्द्रजी, असत्‌ मार्गों में उलझे हुए अपने मन को अपने पुरुषार्थ से बलपूर्वक शुभ मार्गो में लगाओ