Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 9, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 9, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
प्राक्तनं वासनाजालं नियोजयति मां यथा ।
मुने तथैव तिष्ठामि कृपणः किं करोम्यहम् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : मुनिवर,
पूर्वजन्म की वासनाएँ जैसे मुझे कार्य में लगाती हैं, वैसे ही मैं रहता हूँ, परवश मैं कर ही क्या
सकता हू अर्थात् पूर्वजन्म की वासनाओं के अधीन हुए मुझे स्वतन्त्रतापूर्वक कुछ करने की
शक्ति कहाँ है, वासना मुझसे जैसा नाच-नचा रही है, वैसा नाच मैं नाचता हूँ