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Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 9, Verse 24

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 9, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । अत एव हि राम त्वं श्रेयः प्राप्नोषि शाश्वतम् । स्वप्रयत्नोपनीतेन पौरुषेणैव नान्यथा ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

इस समय प्राप्त हो रहे फल में भले ही तुम्हारी स्वतन्त्रता न हो, पर भावी फल के अनुकूल यत्न में तो स्वतन्त्रता है ही । सद्विद्या से सयुक्त जन्म से अनुमित पूर्वजन्म के सत्प्रयत्न की फ़लभूत पूर्व वासना केवल अपने विरुद्ध फलों की अवरोधिका है, अतएव उससे युक्त जन्म में भी यदि पुरुष की सत्प्रवृत्ति में स्वतन्त्रता न हुई, तो कर्म और ब्रह्मविद्यापरक शास्त्र ही व्यर्थ हो जायेंगे । अपने मन में ऐसा अभिप्राय रखकर श्रीवसिष्ठजी ने कहा । श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे रामजी, आप प्रस्तुत जन्म की हेतुभूत वासनाओं की अनुकूलता से ही अपने प्रयत्न से प्राप्त पौरुष द्वारा अक्षय श्रेय को प्राप्त होओगे, अन्यथा नहीं