Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 18, Verse 52
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 18, verse 52 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 52
संस्कृत श्लोक
यैर्यैः काकुत्स्थ दृष्टान्तैस्त्वं मयेहावबोध्यसे ।
सर्वे सकारणास्ते हि प्राप्यन्तु सदकारणम् ॥ ५२ ॥
हिन्दी अर्थ
दृष्टान्तों में विलक्षित सादृश्य के विवेक के लिए त्याज्य अंश को दिखलाते हैं ।
हे काकुत्स्थ, जिन जिन दृष्टान्तों द्वारा मैं आपको बोध करता हूँ वे सब स्मरण (जन्मवान्)
अतएव मिथ्या है, ज्ञातव्य परमार्थ सत्य और कारण रहित (नित्य) है। मिथ्याभूत मिट्टी,
सुवर्ण आदि से बने हुए दृष्टान्तो से ब्रह्म का बोध कराया जाता है । इससे जन्मत्त्व आदि
दुष्टान्तधर्म हेय हैं, यह निष्कर्ष निकला