Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 18, Verse 53
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 18, verse 53 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
उपमानोपमेयानां कार्यकारणतोदिता ।
वर्जयित्वा परं ब्रह्म सर्वेषामेव विद्यते ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
परब्रह्म के दृष्टान्तों में ही यह नियम है, अन्य दृष्टान्तो में यह नियम लागू नहीं है । - ऐसा
कहते हैं।
केवल एक परब्रह्म को छोड़कर सम्पूर्ण उपमान और उपमेयों का कार्यत्व, कारणत्व आदि
से सदृश्य पहले कहा गया है। भाव यह है कि जैसे विचार आदि से बिम्बका ग्राहक ज्ञान उत्पन्न
होता है यह कहा जाता है, वैसे ज्ञान से बिम्ब उत्पन्न होता है, यह नहीं कहना चाहिए, क्योंकि
ब्रह्म की उत्पत्ति नहीं कह सकते हैं