Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 18, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 18, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
यथोषसि प्रवृत्तायामालोकोऽवश्यमेष्यति ।
अस्यां वा चित्तमात्रायां सुविवेकस्तथैष्यति ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
अन्य की अपेक्षा इसमें अतिशय दिखलाते है ।
जैसे प्रातःकाल होने पर अवश्य ही प्रकाश होता हे, वैसे ही इसके भी केवल चित्त में स्थित
करने मात्र से सुन्दर स्वच्छ विवेक होगा