Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 18, Verse 1

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 18, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । अस्यां वा चित्तमात्रायां प्रबोधः संप्रवर्तते । बीजादिव सतो व्युप्तादवश्यंभावि सत्फलम् ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार विषय और प्रयोजन से प्रकरणभेद का वर्णन कर सम्पूर्ण ग्रन्थ के गुणों का वर्णन कर रहे श्रीवसिष्ठजी तत्‌ तत्‌ दृष्टान्तों के उपन्यास में ग्राह्य अंश और तात्पर्य को, ग्रन्थ शैली के ज्ञान के लिए कहते हैं। हे रघुवंशतिलक, जैसे जोते हुए उपजाऊ खेत में उचित समय में बोये गये उत्तम बीज से अवश्यम्भावी सत्फल प्राप्त होता है, वैसे ही पूर्वोक्त छः प्रकरणोंसे युक्त इस मोक्षसंहिता के केवल हृदयंगम करने से ज्ञान प्राप्त होता हे

सर्ग सन्दर्भ

सत्रहवाँ सर्ग समाप्त अठारहवाँ सर्ग मुख्य, अमुल्य ओर आनुषंगिक फलों के साथ इस ग्रन्थ के गुणों का निरूपण |