Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 6, Verses 8–9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 6, verses 8–9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 8,9
संस्कृत श्लोक
तस्य तद्वचनं श्रुत्वा द्वास्था राजगृहं ययुः ।
संभ्रान्तमनसः सर्वे तेन वाक्येन चोदिताः ॥ ८ ॥
ते गत्वा राजसदनं विश्वामित्रमृषिं ततः ।
प्राप्तमावेदयामासुः प्रतीहाराः पतेस्तदा ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
उनके
वचन सुनकर द्वारपाल राजमहल में गये । पूर्वोक्त वाक्य से प्रेरित द्वारपालों ने विलम्ब होने पर कहीं
महर्षि शाप न दे डालें, इस भय से शीघ्र सभागृह में जाकर विश्वामित्रजी के आने का समाचार प्रधान
यष्टिधारी से कहा । उसने त्वरा से सभामण्डप में राजाओं के मध्य में विराजमान महाराज को
श्रीविश्वामित्रजी के आने का समाचार कह सुनाया