Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 6, Verses 1–7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 6, verses 1–7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 1-7
संस्कृत श्लोक
श्रीवाल्मीकिरुवाच ।
इत्युक्ते मुनिनाथेन संदेहवति पार्थिवे ।
खेदवत्यास्थिते मौनं किंचित्कालप्रतीक्षणे ॥ १ ॥
परिखिन्नासु सर्वासु राज्ञीषु नृपसद्मसु ।
स्थितासु सावधानासु रामचेष्टासु सर्वतः ॥ २ ॥
एतस्मिन्नेव काले तु विश्वामित्र इति श्रुतः ।
महर्षिरभ्यगाद्द्रष्टुं तमयोध्यानराधिपम् ॥ ३ ॥
तस्य यज्ञोऽथ रक्षोभिस्तथा विलुलुपे किल ।
मायावीर्यबलोन्मत्तैर्धर्मकार्यस्य धीमतः ॥ ४ ॥
रक्षार्थं तस्य यज्ञस्य द्रष्टुमैच्छत्स पार्थिवम् ।
नहि शक्नोत्यविघ्नेन समाप्तुं स मुनिः क्रतुम् ॥ ५ ॥
ततस्तेषां विनाशार्थमुद्यतस्तपसां निथिः ।
विश्वामित्रो महातेजा अयोध्यामभ्यगात्पुरीम् ॥ ६ ॥
स राज्ञो दर्शनाकाङ्क्षी द्वाराध्यक्षानुवाच ह ।
शीघ्रमाख्यात मां प्राप्तं कौशिकं गाधिनः सुतम् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
वाल्मीकिजी ने कहा : भरद्वाज, जब मुनिवर वशिष्ठजी के यों कहने पर खेदयुक्त, सन्देहनिमग्न
अतएव सन्देह के निर्णय के लिए कुछ काल की प्रतीक्षा करनेवाले महाराज दशरथ मौन हो गये थे ओर
राजमहल में स्थित सभी महारानियाँ उदास होकर श्रीरामचन्द्रजी की चेष्टाओं पर (चेष्टाओं द्वारा
उनके वैराग्य का कारण जानने के लिए) विशेषरूप से सावधान (सतर्क) थी । उसी समय लोकविख्यात
महर्षि विश्वामित्र अयोध्याधिपति महाराज दशरथ को देखने के लिए गये । महामति महर्षि विश्वामित्र
सदा यज्ञ, याग आदि धर्म कार्य ही किया करते थे । माया, वीर्य और बल से उन्मत्त राक्षसो ने उनके यज्ञ
को सर्वथा विघ्वस्त कर डाला । जब वे अविषघ्नपूर्वक यज्ञ समाप्त करने में समर्थ नहीं हुए तब यज्ञ की
रक्षा के लिए उनको राजा के पास जानेकी इच्छा हुई ओर राक्षसो के विनाश के लिए कटिबद्ध महातेजस्वी
महर्षि विश्वामित्र अयोध्या नगरी में पहुँचे | वहाँ पहुँचकर राजा के दर्शन पाने की इच्छा से उन्होने
द्वारपालों से कहा : महाराज से शीघ्र जाकर कहो कि गाधिपुत्र विश्वामित्र आये हुए हैं
सर्ग सन्दर्भ
पौँवर्वौ सर्ग समाप्त छठवाँ सर्ग विश्वामित्रजी का आगमन, राजा द्वारा उनका विधिवत् पूजन तथा ऋषि के आगमनजनित हषद्रिक से "जो आप आज्ञा करेंगे उसका मैं विधिवत् पालन करूंगा" - यों प्रतिज्ञा ।