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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 3, Verse 3

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 3, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

दृश्यात्यन्ताभावबोधं विना तन्नानुभूयते । कदाचित्केनचिन्नाम स्वबोधोऽन्विष्यतामतः ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

पूर्व श्लोक में मुक्ति के लक्षण और स्वरूप स्वानुभवसिद्ध दिखलाये, उनका अनुभव हमें क्यो नहीं होता ? ऐसी शंका होने पर कहते हैं। भरद्वाज, जब तक दृश्य के अत्यन्त अभाव का ज्ञान नहीं होता अर्थात्‌ सम्पूर्ण दृश्य प्रपंच भ्रान्तिकल्पित है, अतएव अत्यन्त असत्‌ है, यह ज्ञान जब तक ढृढ़तापूर्वक नहीं होता तब तक कोई भी किसी प्रकार मुक्ति के लक्षण और स्वरूप का ज्ञान प्राप्त करने में समर्थ नहीं हो सकता सम्पूर्ण जगत्‌ के अधिष्ठान प्रत्यगभिन्‍न आत्मतत्त्वके साक्षात्‌ से ही दृश्य का अत्यन्त बाध हो सकता है । इसलिए अविसंवादी आत्मज्ञान को उपाय से प्राप्त करो