Guru's AddaGuru's Adda

Vairagya Prakarana (Dispassion) · Sarga 28

6 verse-groups

  1. Verses 1–14मनुष्यों की चहल-पहल से परिपूर्ण नगर दिखाई देता है, कुछ ही दिनों के बाद वहीं पर सूना अरण्य…
  2. Verses 15–16ब्रह्मन्‌, कटाक्षदर्शन के समान क्षणभंगुर व्यवहारपरम्परा से मनोहर यह संसाररचना कटाक्षपात औ…
  3. Verses 17–24महर्षिजी, आप विचार कर देखें वे उत्सव और वैभव से परिपूर्ण दिन, वे महापुरुष, वे प्रचुर सम्प…
  4. Verses 25–26मुनिवर, इस संसार मेँ क्षण भर में मनुष्य वैभवपूर्ण हो जाता है, क्षणभर में दरिद्र बन जाता ह…
  5. Verses 27–30इस जगत्‌ की अनियत स्थिति को ही उदाहरण द्वारा विशद करते है । आकाशमण्डल कभी निविड अन्धकार स…
  6. Verses 31–43को परमात्मा वृद्धि को प्राप्त कराता है, विपरिणाम को प्राप्त कराता है, क्षीण करता है, नष्ट…