Vairagya Prakarana (Dispassion) · Sarga 28
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- Verses 1–14मनुष्यों की चहल-पहल से परिपूर्ण नगर दिखाई देता है, कुछ ही दिनों के बाद वहीं पर सूना अरण्य…
- Verses 15–16ब्रह्मन्, कटाक्षदर्शन के समान क्षणभंगुर व्यवहारपरम्परा से मनोहर यह संसाररचना कटाक्षपात औ…
- Verses 17–24महर्षिजी, आप विचार कर देखें वे उत्सव और वैभव से परिपूर्ण दिन, वे महापुरुष, वे प्रचुर सम्प…
- Verses 25–26मुनिवर, इस संसार मेँ क्षण भर में मनुष्य वैभवपूर्ण हो जाता है, क्षणभर में दरिद्र बन जाता ह…
- Verses 27–30इस जगत् की अनियत स्थिति को ही उदाहरण द्वारा विशद करते है । आकाशमण्डल कभी निविड अन्धकार स…
- Verses 31–43को परमात्मा वृद्धि को प्राप्त कराता है, विपरिणाम को प्राप्त कराता है, क्षीण करता है, नष्ट…