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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 26, Verse 43

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 26, verse 43 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 43

संस्कृत श्लोक

अद्योत्सवोऽयमृतुरेष तथेह यात्रा ते बन्धवः सुखमिदं सविशेषभोगम् । इत्थं मुधैव कलयन्सुविकल्पजालमालोलपेलवमतिर्गलतीह लोकः ॥ ४३ ॥

हिन्दी अर्थ

ऋषिप्रवर, इस संसार में चंचल और मंद बुद्धि से युक्त लोग आज उत्सव है, यह सुहावनी ऋतु है, इसमें यात्रा करनी चाहिए, ये हमारे बान्धव हैं, विशिष्ट भोगों से युक्त यह सुख है, यों वृथा ही अनेक संकल्प-विकल्प कर नष्ट हो जाते हैं