Guru's AddaGuru's Adda

Vairagya Prakarana (Dispassion) · Sarga 26

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  1. Verses 1–6है, तब भला बतलाइये तो सही इसमें मेरे जैसे मनुष्यों का क्या विश्वास हो सकता है ? मुनिवर, य…
  2. Verses 7–32मुनिवर, संसार में जितने भी प्राणी हैं, उनमें किसीका भी ऐश्वर्य पूर्ण नहीं है, सभी तुच्छ ए…
  3. Verses 33–42उसकी सर्वनाशकता का उपपादन करने के लिए निरंकुश स्वतन्त्रता कहते है। जैसे पर्वत शिखर से वेग…
  4. Verse 43ऋषिप्रवर, इस संसार में चंचल और मंद बुद्धि से युक्त लोग आज उत्सव है, यह सुहावनी ऋतु है, इस…