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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 23, Verse 24

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 23, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

रुद्रो भूत्वा भवत्येष महेन्द्रोऽथ पितामहः । शक्रो वैश्रवणश्चापि पुनरेव न किंचन ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

यह काल रुद्र का रूप धारण कर महेन्द्र का रूप धारण करता है, फिर ब्रह्मा का रूप धारण करता है, फिर इन्द्र होता है और फिर कुबेर होता है, और अन्त में कुछ भी नहीं अर्थात्‌ प्रलय में पर्यवसित हो जाता हे