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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 23, Verse 23

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 23, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

अस्योड्डामरवृत्तस्य कल्पान्तेऽङ्गविनिर्गतैः । प्रस्फुरत्यम्बरे मेरुर्भूर्जत्वगिव वायुभिः ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रलय के समय निरंकुश चरित्रवाले इस काल के अंगों से निकले हुए वायुओं से विशाल सुमेरु पर्वत भूर्जपत्र के समान आकाश में फड़फड़ाता है अर्थात्‌ चारों ओर से टूटने फूटने लगता है। बात यह है कि जैसे वायु से अतिकोमल भूर्जपत्र फटकर नष्ट हो जाता है, वैसे ही इस निरंकुशशिरोमणि के शरीर से निर्गत वायुओं से विशालतम सुमेरु पर्वत आकाश में उड़कर विशीर्णं हो जाता है