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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 22, Verse 12

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 22, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

गर्धोऽभ्युदेति सोल्लासमुपभोक्तुं न शक्यते । हृदयं दह्यते नूनं शक्तिदौस्थ्येन वार्धके ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

वृद्धावस्था में भोजन की शक्ति होने पर पचाने की अशक्ति, पचाने की शक्ति होने पर भोजन की अशक्ति इत्यादि शक्तिहास से भोग की इच्छा तो बड़ी प्रबल हो उठती है, पर उपभोग नहीं किया जा सकता और हृदय सदा जलता रहता है