Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 22, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 22, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
कथं कदा मे किमिव स्वादु स्याद्भोजनं जनात् ।
इत्यजस्रं जरा चैषा चेतो दहति वार्धके ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
वृद्धावस्था में, अपने
आत्मीय जनों से मुझे किस प्रकार कब कुछ स्वादिष्ट भोजन प्राप्त होगा, ऐसी चिन्तारूपी दूसरी जरा
सदा चित्त को जलाती रहती है