Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 20, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 20, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
उद्वोधयति दोषालिं निकृन्तति गुणावलिम् ।
नराणां यौवनोल्लासो विलासो दुष्कृतश्रियाम् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
मनुष्यों का योवनोल्लास (यौवन की अभिवृद्धि) दोषों को जगाता है, उत्पन्न
करता है ओर गुणों का मूलोच्छेद करता है अतएव वह पापों की वृद्धि करने के कारण पापोँ का विलास
हे