Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 20, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 20, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
रसकेसरसंबाधं कुविकल्पदलाकुलम् ।
दुश्चिन्ताचञ्चरीकाणां पुष्करं विद्धि यौवनम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
मुनिवर, आप यौवन को दुष्ट चिन्तारूपी भ्रमरों का आवासभूत कमल समझिए।
वह विषयसुखकणरूपी मधु-बिन्दुओं और रागादिरूपी केसरों से भरा हुआ है, और दुष्ट संकल्परूपी
पंखुड़ियों से व्याप्त है । अर्थात् जैसे कमल के ऊपर भ्रमर मँडराते हे, वह मकरन्द और केसर से
खचाखच भरा रहता है और चारों ओर से पंखुड़ियों से घिरा रहता है, वैसे ही युवावस्था में मनुष्य के
चित्त में अनेक दुष्ट चिन्ताएँ मँडराती है, बुरे संकल्प घेरे रहते हैं और विषयसुखकण और राग का
साम्राज्य छाया रहता है