Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 18, Verse 48
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 18, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
दीर्घदौरात्म्यवलया निपातफलपातया ।
न देहलतया कार्यं किंचिदस्ति विवेकिनः ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
दुष्टतारूपी बड़े बड़े बंधनों से
युक्त ओर दुश्चरितों से जिसका पतन अवश्यम्भावी है, ऐसी देहरूपी लता से विवेकी पुरुष का कुछ भी
काम नहीं है