Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 16, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 16, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
क्रूरेण जडतां यातस्तृष्णाभार्यानुगामिना ।
शवं कौलेयकेनेव ब्रह्मन्मुक्तोऽस्मि चेतसा ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे क्रूर और तृष्णा के
समान सदा भूखी कुत्ती के पीछे चलनेवाला कुत्ता शव को खा जाता है, वैसे ही निष्ठुर और तृष्णारूपी
भार्या के पीछे-पीछे चलनेवाला चित्त अज्ञता को प्राप्त हुए मुझको खा गया है