Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 16, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 16, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
संततामर्षधूमेन चिन्ताज्वालाकुलेन च ।
वह्निनेव तृणं शुष्कं मुने दग्धोऽस्मि चेतसा ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
मुने,
जैसे दुःसह धूम और ज्वाला से युक्त अग्नि सूखे तृण को जला डालती है, वैसे ही विस्तारित कोपरूपी
धूम से युक्त चिन्तारूपी ज्वाला से व्याप्त चित्त से मैं जलाया गया हूँ