Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 13, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 13, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
एषा हि विषमा दुःखभोगिनां गहना गुहा ।
घनमोहगजेन्द्राणां विन्ध्यशैलमहातटी ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुनिवर, अज्ञ लोगों ने जिस श्री को
सुख की हेतु समझ रक्खा है, वह दुःखरूप सर्पो की दुर्गम ओर भीषण गुफा है एवं महामोहरूपी हाथियों
का आवास रूप विन्ध्याचल का मैदान है अर्थात् यह श्री महादुःखदायिनी ओर महामोह से आवृत्त
करनेवाली है