Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 12, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 12, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
अस्थिराः सर्व एवेमे सचराचरचेष्टिताः ।
आपदां पतयः पापा भावा विभवभूमयः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
(शास्त्रकारों ने भी मृतिबीजं भवेज्जन्म जन्म बीजं भवेन्मृति:' यानी मरण में जन्म कारण है और
जन्म में मरण कारण है, ऐसा कहा है |)
इस विषय में यदि शंका हो कि भले ही जन्म ओर मरण दुःखरूप हों, परन्तु उनके बीच में जीवनदशा
में चुख मिलता ही है, तो इस पर कहते है ।
चर और अचरों की चेष्टाओं से युक्त वैभवकाल में रहनेवाले ये जितने भोग के साधन पदार्थ
हैं, ये सबके-सब अस्थिर याने क्षणिक हैं, ये आपत्तियों के ही स्वामी यानी मूल हैं और पाप के हेतु
हैं पापस्वरूप हैं