Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 10, Verse 30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 10, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
आपातमात्रहृद्येषु मा भोगेषु मनः कृथाः ।
इति पार्श्वगतं भव्यमनुशास्ति सुहृज्जनम् ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
अपने समीप के विवेकी मित्रों को
यह उपदेश देते हैँ कि इन ऊपर-ऊपर से सुन्दर दीखनेवाले क्षणिकसुखजनक विषयों से तुम अपना
मन हटा लो अर्थात् क्षणिक असत् विषयों मे अपना मन कभी मत लगाओ