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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, Verse 16

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 99 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

सुप्तानां यादृगस्माकं वेदनं स्पष्टसुत्वचाम् । वृक्षगुल्माङ्कुरादीनां तादृगुद्दामवेदनम् ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

वृक्ष आदि के दुख, दुःख के अनुभव की प्रणाली हमारे चख दुःख के अनुभव के अनुरूप ही हैं, ऐसा उपपादन करते है / सुकुमार त्वचावाले हम लोग जब निद्रादेवी की गोद मेँ अचेत होकर सोये रहते हैं तब यदि अत्यधिक शीत, गर्मी, मच्छर, खटमल आदि हमें तंग करते हैं तो सुखशून्य नींद में हमें जैसे महाक्लेश का अनुभव होता है वैसे ही महाक्लेश का अनुभव पेड, पौधे, अंकुर आदि को होता है । श्लोक में अंकुर का ग्रहण अति छूकुमार होने के कारण उसे कृमि, की आदि के काटने पर अत्यन्त क्लेश होता हैं यह सूचित करने के लिए है