Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 99 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
पादपाः किंचिदुन्निद्रा घननिद्राः खलूपलाः ।
कृमिकीटादयः कार्ये नरवत्स्वप्नबोधिनः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
वृक्ष आदि स्थावर जीव कुछ जागते रहते हैं, पत्थर एकदम सोते ही रहते हैं। यानी
घनी नींद से सोये हुए ही रहते हैं और कृमि, कीट आदि तो हम मनुष्यों के जैसे अपने अपने उचित
विषयभोगों में निद्रा एवं जागरण-दोनों से युक्त रहते हैं