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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 97, Verse 14

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 97, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 97 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

अयं लोकः परश्चास्ति स्नानाग्न्यादि च नेतरत् । एतदेतादृशं सत्यं विद्धि भावितभावनम् ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

आस्तिको के मत में जैसे यह लोक हे, वैसे परलोक भी है, अतः परलोकार्थियों के लिए तीर्थ-स्नान, अग्निहोत्र आदि निष्फल नहीं हैं इस तरह की उन आस्तिको के द्वारा यह जो निर्धारित कल्पना है, वह भी सत्य ही है