Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 95, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 95, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 95 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
घनत्वमहमासाद्य तथा सर्गस्य शाम्यति ।
परिज्ञाता यथा स्वप्ननिधेरादेयभावना ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
ज्ञान होने पर अहंकाररूप स्थूलता सबकी ऐसे शान्त हो जाती
है, जैसे कि भलीभाँति ज्ञात हो जाने पर स्वाप्निक धन में उपादेयता की वासना