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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 95, Verse 13

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 95, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 95 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

यदेतदातिवाहित्वमाधिभौतिकता च खम् । द्वयमप्येकदेहात्म ततः कचति मे चितिः ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

तब अन्न ग्राणियों की नाई भौतिक देहवाले ही आप क्यों नहीं हुए, इस्रपर कहते है / चूँकि आतिवाहिकता (सूक्ष्मता) ओर आधिभौतिकता - ये दोनों ही चिदाकाश रूप ही हैं । चिदाकाश रूप से एक ही देहात्मा है, यही मैंने तत्त्वतः समझा है इसलिए हे श्रीरामचन्द्रजी मेरी चिति ही आत्मभाव से स्फुरित होती है, न कि देहात्मभावसे देहात्मभाव स्फुरित है