Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 77
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, verse 77 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 77
संस्कृत श्लोक
पश्यन्ति काश्चिदन्योन्यं ग्राम्या ग्राम्येयकानिव ।
स्वप्नैकलोकवास्तव्या इवैता भूतजातयः ॥ ७७ ॥
हिन्दी अर्थ
स्वप्नलोक में निवास करनेवालों के सदृश कोई कोई पिशाचों की ये
जातियाँ भी परस्पर एक दूसरे को इस तरह देखती हैं (यानी दर्शन आदि के द्वारा एक दूसरे
के साथ ऐसे व्यवहार करती हैं,) जैसे गाँव में रहनेवाले प्राणी गाँव के निवासियों को