Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 76
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, verse 76 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 76
संस्कृत श्लोक
पिशाचाद्यास्तथा एते तथाभूताधिभौतिकाः ।
तिष्ठन्ति तुष्टमनसः स्वसंसारविहारिणः ॥ ७६ ॥
हिन्दी अर्थ
ये पिशाच आदि भी चिरकाल के अभ्यास से आधिभौतिक रूपता को प्राप्त होकर
अपने संसार में विहार करते हुए अपनी योनि के योग्य भोगों से सन्तुष्टचित्त हो अवस्थित रहते
हैं । तात्पर्य यह की उनकी पिशाच देह और कुत्सित भोग भी उन्हें अत्यन्त प्रिय ही लगते
हैं बीभत्स नहीं