Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verses 67–68

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, verses 67–68 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 67,68

संस्कृत श्लोक

आशून्ये विपुलाभोगे स्वच्छचिज्जलपूरिते । कलनापङ्ककलिले भविष्यति चिदम्बरे ॥ ६७ ॥ अन्तरिक्षाक्षयक्षेत्रे खात्मनो गगनात्मिका । तस्माद्बीजादियं जाता भूरिभूतशिलावलिः ॥ ६८ ॥

हिन्दी अर्थ

सर्वदा शून्य, विपुल आभोगवाले, स्वच्छ चितिरूपी जल से परिपूर्ण, चिदाकाशरूपी अविनाशी क्षेत्र (खेत) के अज्ञानकल्पनारूपी पंक से व्याप्त होने पर उसमें उस चिदाकाश स्वरूप बीज से ही चिदाकाशात्मक यह अनन्त पंचभूतरूप ब्रह्माण्डवबीजशिलाओं की पंक्ति उत्पन्न हुई हैं और आगे चलकर भी होगी