Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 64
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, verse 64 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 64
संस्कृत श्लोक
किंचिदाकाशकोशस्य तव वा मम वानघ ।
जगतो वापि जायेत किं वा नश्यति मे वद ॥ ६४ ॥
हिन्दी अर्थ
एकमात्र यही कारण है कि आत्मा की विदाकाशरूपता का अनुसन्धान करने पर आपके, मेरे
या अन्य किसी के भी ये सर्ग आदि कुछ भी नहीं है, यह कहते हैं /
इसलिए हे निष्पाप श्रीरामचन्द्रजी, यह मुझसे कहिये कि चिदाकाशस्वरूप मेरा, आपका
या संसार का ही क्या उत्पन्न होता है तथा क्या नष्ट होता है ?